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Monday, October 10, 2016

तेरा फितूर... !!!


तू आज भी अज़ीज़ है,
यूँ तो उम्र गुज़र गयी..
मेरी तिश्नगी की रहगुज़र
तेरे हाशिये में सिमट गयी

मेरे वजूद में तेरा फितूर है
मेरे अदब को तेरा गुरूर है
मेरी ख़ामख़ा की बंदिशें
तेरी सरहदों में मिट गयीं !

अर्चना 
10-10-2016

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