मेरी हर शिक़स्त है
तेरी नज़र-ए -रफ़त
मेरी हर बग़ावत
तेरा नूर है
तेरी क़ायनात का
मैं कोहीनूर
मेरी शख्शियत
तेरा गुरूर है.. !
जो मैं हूँ तो हूँ
मेरा सिरफिरा जुनूँ
तेरे कारवाँ से अलग-थलग
मैं खुद के नशे में चूर हूँ
जो तू है बुलंद
दूर आसमान तक
मैं ज़मीं पे उड़ने में
मशहूर हूँ .... !
अर्चना ~
19-05-2015