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Tuesday, May 19, 2015

मैं.... !!!


मेरी हर शिक़स्त है
तेरी नज़र-ए -रफ़त
मेरी हर बग़ावत
तेरा नूर है
तेरी क़ायनात का
मैं कोहीनूर
मेरी शख्शियत
तेरा गुरूर है..  !


जो मैं हूँ तो हूँ
मेरा सिरफिरा जुनूँ
तेरे कारवाँ से अलग-थलग
मैं खुद के नशे में चूर हूँ
जो तू है बुलंद
दूर आसमान तक
मैं ज़मीं पे उड़ने में
 मशहूर हूँ  .... !


अर्चना ~
19-05-2015





2 comments:

  1. sach me aapne bahut hi dilkash khubsurat lines likhi hai aapka name archana nahi mirza galib archana hona chahiye
    ----javed khan your student for English spoken

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