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Monday, January 27, 2014

मुझे पंख दे दो !

उस पार .......
है सतरंगी आसमान
मेरी कल्पनाओं की पहचान
मैं जाऊँगी उड़ते-उड़ते
पेड़, पहाड़ी, ताल नापते
मुझे पंख दे दो !!


अर्चना ~ 27-01-2014

3 comments:

  1. Kaise Likh late ho aap... ):): bhot hi sundar kalpana hai aapki

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  2. Thanks Anu :) Bas jo dimaag mein aata hai chaap deti hoon...... :)

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  3. बेकरार हूँ उड़ने को..आओ, मुझे भी पंख लगा दो ...

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