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Thursday, April 17, 2014

मैं हवा..... !!

हवा की तरह आती हूँ
छूती हूँ तुम्हें, पर
नज़र कहाँ आती हूँ

मन की उलझन से उदास
तुम हताश, बेहताश
और.………
मैं नापूँ, सारा आकाश !!

अर्चना ~ 17-04-2014

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